First Love Marriage in The World : भगवान शिव-पार्वती का विवाह था, पहला लव मैरेज

First Love Marriage in The World: आज कल internet पर एक चैलेंज खूब वायरल हो रहा है. ये चैलेंज है कपल चैलेंज, जिसमें कपल सोशल मीडिया पर  एक-दूसरे के साथ फोटो डालते हैं, या फिर अपनी लव स्टोरी के बारे में बताते हैं. ये कपल चैलेंज सेलेब्स की वजह से और भी ज्यादा वायरल हो रहा है. क्योंकि वो ही इस चैलेंज में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं.

इस चैलेंज को कपल गोल के तौर पर भी देखा जा रहा है. किसी का कपल गोल विराट- अनुष्का की जोड़ी है, तो किसी का कपल गोल दीपिका-रणवीर की जोड़ी है. भले ही इन सेलेब्स की लव स्टोर बहुत फेमस और कई मयाने में खास हैं. लेकिन इनकी लव स्टोर (First Love Marriage in The World) को सबसे बेस्ट तो नहीं कहा जा सकता है. क्योंकि एक ऐसी भी जोड़ी है, जो कि सभी का कपल गोल है खुद सेलेब्स का भी, और वो है, भगवान शिव और पार्वती जी (First Love Marriage in The World) कि जोड़ी.

first love marriage
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शिव विवाह कोई साधारण विवाह नहीं था. प्रेम, समर्पण और तप की परिणति था शिव विवाह (First Love Marriage in The World). दुनिया की बड़ी से बड़ी लव स्टोरी इस कहानी के आगे फेल है.

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जितनी नाटकीयता और उतार-चढ़ाव इस प्रेम कहानी में है, वो दुनिया की सबसे हिट रोमांटिक फिल्म में भी नहीं होगी. आज हम आपको भगवान शिव और पार्वती जी कि प्रेम कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं.

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यह कहानी एक जन्म की नहीं है. पार्वती पिछले जन्म में भी शिव की पत्नी थी, तब उनका नाम सती था और वे प्रजापति दक्ष की बेटी थी. परम प्रतापी राजा दक्ष ने जानबूझकर अपने दामाद शिव को अपमानित किया, जिससे आहत को होकर सती हवनकुंड में कूद गईं. सती के वियोग में शिव में विरक्ति का भाव भर दिया और वे तपस्या में लीन हो गए.

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उधर शिव को फिर से हासिल करने के लिए सती ने पार्वती बनकर हिमालय के घर जन्म लिया. देवताओं ने शिव उनका ध्यान भंग करने के लिए कामदेव को भेजा तो शिव ने उन्हे भस्म कर दिया. लेकिन यह प्रेम कहानी का अंत नहीं है.

सती के जाने के बाद भगवान शिव ने रुद्र अवतार लेकर प्रजापति दक्ष का सिर धर से अलग कर दिया था. बाद में शिव जी तपस्या में लीन हो गए थे.

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उधर शिव को फिर से हासिल करने के लिए सती ने पार्वती बनकर हिमालय के घर जन्म लिया. देवताओं ने शिव उनका ध्यान भंग करने के लिए कामदेव को भेजा तो शिव ने उन्हे भस्म कर दिया. लेकिन पार्वती ने शिव को प्राप्त करने के लिए तप जारी रखा. आखिरकार बाबा भोलेनाथ को पिघलना पड़ा और वे नंदी पर सवार होकर नंगे बदन पर भभूत मले बड़े ठाठ से बारात लेकर आए.

 

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शिवपुराण के मुताबित है शिव जी की बारात में देवी देवताओं के साथ भूत-प्रेत से लेकर तमाम पशु-पक्षियों और कीड़े-मकोड़े तक इस बारात का हिस्सा रहे थे. शिव पार्वती कि यह प्रेम कहानी (first love marriage in the world) प्यार का दिन महाशिवरात्रि, प्यार के इस मिलन को कहा गया है महाशिवरात्रि, जिसे हम महापर्व के रूप में हर साल मनाते हैं.

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शिवजी से विवाह करके पार्वती (first love marriage in the world) उनके साथ कैलाश पर चली गई और इस तरह दो जन्मों से चल रही एक प्रेम कहानी की हैप्पी एंडिंग हुई. अगर आप भी मां पार्वती (गौरी) की तरह अपना मनचाहा वर प्राप्त करना चाहती हैं तो आप इस सिद्ध मंत्र की सहायता से अपनी मनोकामना पूर्ण कर सकती हैं 👇

 

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5 COMMENTS

  1. Wrong Answer hai Hindu Dharma manyata k anusar Bhagwan Shiv ki pehli patni ka nam Sati tha aur sati dehant ke bad Shiv ka parwati ke sath vivah huwa tha ,,, to is tarike se dekha jaye to pehla Prem vivah Shiv – Sati vivah hai ,, na ki Shiv – Parwati vivah…

    • apke vichar pragat karne ke liye thanks ..Manjit ji..
      lekin yaha first love marriage ki bat ho rahi he.. bhagwan shiv and maa sati ka vivah poori tarah arranged marriage tha..mata sati ne koi tapsya ya kamna nhi ki thi bhagwan shiv ko pane ki..jabki maa parvati ne bhagwan shiv ko var roop me pane ke liye tapsya ki thi..toh is karan pahla prem vivah bhagwan shiv evam ma parvati ka hi mana jayega..

  2. Bhagvan bhi love marriage krte hai fir ham Jaise sadharan manusya ko love marriage krne pr qu galt kha jata hai ….q hamare character ko glt kha jata hai

    • क्योंकि लव मेर्रिज को खेल बनाने वालों की कमी नही है आपका प्यार सच्चा है लेकिन पय्यार के नाम मे खिलवाड़ करने वालों की कमी नही है,
      प्यार करना और निभाना ये अलग बात है , आज भी लोगों की मानसिकता लव मेर्रिज के प्रति खराव है इसका कारण आज का युवा वर्ग भी है , साथ ही अपने प्यार के लिए लडने वाले भी कम है , सीधा रस्ता अपनाया जाता है , कायदे से स्वीकार करना चाइए समाज परिवार सबको लेकिन उनके अंदर एक डर भरा है कि कही हमने ये छूट देनी चालू की तो फिर गलत प्रव्रत्ति के लोग भी पूरा फायदा उठाएंगे , और ऐसे जोड़ो का निर्माण होगा जो न जीवन चलाने के काबिल होंन्गे न आर्थिक रूप से एक दूसरे के जीवन को सवारने के काबिल , केवल पय्यार से पेट नहीं भरता , पर कुछ बुरे लोगों की वजह से कई सच्चे प्यार को सूली में चढ़ाया जाता है ये भी सरासर गलत है।

    • Wo bhagwan h or apn insaan….
      Waha Prem Satya h…
      Or yaha Prem ko Har Oyo m nagga kiya jata h…
      Jyada kuch nh bolna chahta hu…
      Sorry….

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